Sunday, November 11, 2018

राज्य की प्रमुख फसलें Chhattisgarh Ke Pramukh Fasalen

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राज्य की प्रमुख फसलें

Major crops of the state

Major crops of the state


Chhattisgarh Ke Pramukh Fasalen

राज्य में खरीफ , रबी एवं जायद तीनों प्रकार की फसलें उपजाई जाती हैं , परन्तु मुख्य कृषि खरीफ में होती है ।

चावल  ( Rice )
• यह राज्य की मुख्य फसल है । यहाँ । सर्वाधिक उत्पादन चावल का ही होता है । प्रदेश में कुल कृषि योग्य भूमि के 67 % भाग में चावल की खेती होती है । राज्य के लगभग 36 लाख हेक्टेयर भूमि पर चावल की खेती होती है । चावल की फसल वर्षा ऋतु के आरम्भ में बोई जाती है।

छत्तीसगढ़ में चावल मुख्यतः मैदानी भागों में अधिक होता है । इसके क्षेत्र हैं — दुर्ग , जांजगीर - चाँपा , रायपुर , बिलासपुर , राजनान्दगाँव , कोरबा , सरगुजा । राज्य में चावल का प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन 2 , 160 किग्रा है ।

गेहूं ( Wheat )
छत्तीसगढ़ में गेहूं के अन्तर्गत कम क्षेत्रफल । ( 1 . 5 % ) का मुख्य कारण शीतकाल में सिंचाई की सुविधाओं की कमी है । कांकेर ,कोयलाबेड़ा , सामरी तहसीलों में गेहूँ के अन्तर्गत कुल भूमि का 1 % या कुछ । अधिक है । कोण्टा , बीजापुर , दन्तेवाड़ा तहसीलों में गेहूं की खेती नगण्य है । इसके पश्चात् क्रमशः दुर्ग , रायपुर , बिलासपुर , राजनान्दगाँव , रायगढ़ तथा बस्तर का स्थान है ।

कोदो - कुटकी 
० कोदो - कुटकी मोटे अनाज की फसल है धान के पश्चात् कोदो - कुटकी राज्य की दूसरी प्रमुख उपज है । इसे गरीबों का अनाज कहा जाता है । वर्ष 2012 - 13 में 1 . 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में यह फसल बोई गई थी । सरगुजा मक्का का सर्वाधिक उत्पादक जिला है ।

अरहर 
 यह एक प्रमुख दलहन फसल है । इस । फसल को जुलाई - अगस्त में बोया जाता है । तथा मार्च - अप्रैल में काटा जाता है । इसे वर्षा के आरम्भ में कपास एवं ज्वार के साथ बोया जाता है । इस फसल के साथ ज्वार और कपास की फसल बोई जाती है ।


ज्वार
• ज्वार खरीफ एवं रबी दोनों की फसल है , लेकिन ज्वार का खरीफ क्षेत्र अधिक है । यह जून - जुलाई में बोई जाती है एवं । | सितम्बर - अक्टूबर में काट ली जाती है ।

मक्का
० यह प्रदेश के सभी हिस्सों में बहुत छोटे । पैमाने पर उगाई जाती है । अक्सर किसान अपनी बाड़ियों में इसकी फसल बोते हैं । सरगुजा , बस्तर , दन्तेवाड़ा , कोरिया , जशपुर , कोरबा , बिलासपुर आदि प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं ।

कपास
• छत्तीसगढ़ में कपास का उत्पादन नहीं होता । यद्यपि दन्तेवाड़ा , बस्तर , सरगुजा । एवं धमतरी जिलों में अत्यल्प क्षेत्र में इसकी खेती की जा रही है । • केन्द्रीय पोषित सघन कपास विकास कार्यक्रम जगदलपुर , दन्तेवाड़ा और कांकेर जिलों में चलाया जा रहा है ।


गन्ना
• राज्य में गन्ने की खेती यदा - कदा की । जाती है । राजनान्दगाँव , कबीरधाम , दुर्ग , रायपुर तथा इसके आसपास के क्षेत्रों में । | गन्ने की खेती की जाती है । • सरगुजा , रायगढ़ , बस्तर तथा बिलासपुर जिलों में इसकी खेती होती है । गन्ने की । खेती राज्य के 2 , 000 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है । राज्य के रायगढ़ में शक्कर । । मिल की स्थापना प्रस्तावित है ।

उड़द
० दलहन में चने के बाद उड़द का दूसरा । स्थान है । इसके उत्पादन में अग्रणी जिले रायगढ़ , कोरबा , धमतरी एवं महासमुन्द हैं , जबकि आवश्यकतानुसार यह सभी जिलों में उड़द बोई जाती है ।

सन ( जूट ) तथा मेस्टा
सन तथा मेस्टा का उत्पादन केवल रायगढ़ में होता है , क्योंकि यहाँ इस राज्य की एकमात्र जूट मिल स्थापित हैं।

सनई
इसका उत्पादन केवल रायगढ़ जिले में होता है , जो यहाँ की जूट मिलों के लिए जूट के विकल्प के रूप में विकसित किया जा रहा है ।


सरसों ( Mustard )
सरसों राज्य की प्रमुख तिलहन फसलों में ' से एक है । सरसों की भाजी व फल का । यहाँ विशेष महत्त्व है ।

अलसी
० यह राज्य की परम्परागत तिलहन फसल है , जिसका उपयोग प्राचीन समय से यहाँ के लोग खाद्य तेल के रूप में करते । आए हैं । प्रदेश में यह उत्तरा फसल के रूप | में बोई जाती है । अलसी सम्पूर्ण प्रदेश की । सर्वाधिक लोकप्रिय तिलहन है ।

चना
 • चना का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र दुर्ग , कबीरधाम , बिलासपुर , राजनान्दगाँव , रायपुर इत्यादि हैं ।

मूंगफली ( Peanut )
० यह प्रदेश में रायगढ़ , महासमुन्द , सरगुजा , बिलासपुर , जांजगीर - चाँपा तथा रायपुर जिलों में मुख्यतः बोई जाती है । मूंगफली का । उपयोग तेल एवं भोज्य पदार्थ दोनों के । लिए किया जाता है । यह मुख्यतः खरीफ की फसल है । ।


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