• Chhattisgarh General Knowledge 

लोग गीतों के प्रमुख गायक व गायिका

पंडवानी भरथरी लोग गायक
झाडूराम देवांगन सुरुज भाई खांडे केदार यादव
पुनागम निषाद रेखा जलक्षत्री मान दास टंडन
तीजन बाई लोक गायिका गंगाराम शिवार
लक्ष्मी बाई बंजारे किस्मत बाई देवार संतोष शुक्ला
शांति बाई चेलक जयंती यादव भैयालाल यादव हेडाऊ
बृजलाल पारधी ममता चंद्राकर नरेश निर्मलकर
रेखा यादव साधना यादव शेख हुसैन
ऋतु वर्मा बसंती दीवार बेतूल राम साहू
रेवाराम गंजीर रजनी रजक नवलदास मानिकपुरी
प्रभा यादव अनुराग ठाकुर ध्रुव राम मरकाम


पदमश्री तीजनबाई ✓ [ Life introduction ]

 • इनका जन्म वर्ष 1956 में पाटन ( दुर्ग ) में हुआ था । वेदमन्ती शैली की ख्यातिलब्ध पण्डवानी गायिका , छत्तीसगढ़ की लोककला पण्डवानी को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने का श्रेय इन्हीं को जाता है । भारत सरकार का पद्मश्री सम्मान , मध्य प्रदेश सरकार का देवी अहिल्याबाई पुरस्कार , इनको प्राप्त है । 

• ये संगीत नाट्य अकादमी , नई दिल्ली से सम्मानित हैं । वर्ष 1973 से पण्डवानी गायन का आरम्भ करते हुए तीजनबाई अब तक भारत के बड़े शहरों के साथ फ्रांस , मॉरिशस , बांग्लादेश , स्विट्जरलैण्ड , जर्मनी , तुर्की , माल्टा , साइप्रस आदि देशों में कार्यक्रम कर चुकी हैं । 

पी आर उराँव✓ [ Life introduction ]

• इनका जन्म 6 जनवरी , 1943 को रायगढ़ में हुआ था । अर्थशास्त्र में एम ए पी आर उराँव वर्ष 1974 में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के द्वारा नायब तहसीलदार बने । लोककला की यात्रा , प्रशासनिक कामकाज के साथ - साथ , वे जहाँ भी पदस्थ होते थे , वहीं छत्तीसगढ़ी लोककला मंच का गठन अवश्य करते । 

• इन्होनें रायपुर में 15 कलाकारों की टीम के साथ रायपुर लोककला मंच की स्थापना को । इनके 110 छत्तीसगढ़ी गीतों का संग्रह गुरतुर नाम से अभी हाल ही में प्रकाशित हुआ है । ये अपने गीतों का प्रदर्शन मंच पर करते हैं तथा वर्तमान में ये रायपुर विकास प्राधिकरण में मुख्य कार्यपालन अधिकारी हैं । 

कविता वासनिक✓ [ Life introduction ]

• इनका जन्म 18 जुलाई , 1962 में राजनान्दगाँव में हुआ था । शिक्षा एम एस सी , व्यवसाय बैंक कर्मचारी , बचपन से गायन , विभिन्न कार्यक्रमों में गायन , अभिनय , छत्तीसगढ़ी गीतों के सात रिकॉर्ड्स ( कैसेट ) बन चुके हैं । 

• नाट्य संस्थाओं चन्दैनी गोंदा , सोनहा बिहान , कारी आदि से सक्रिय रूप से सम्बद्ध , समय - समय पर विभिन्न सांस्कृतिक मंचों द्वारा सम्मानित ।

* छत्तीसगढ़ के प्रमुख गीत ( Chhattisgrah Ke Pramukh Geet )✓


गीत - विवरण


सुआ गीत - प्रमुखतः गोण्ड आदिवासी स्त्रियों का नृत्य गीत है । इसे गौरी नृत्य गीत भी कहा जाता है । 


सेवा गीत - छत्तीसगढ़ में चेचक को माता माना जाता है । इसकी शान्ति के लिए माता सेवा गीत गाया जाता है । 


जॉवरा गीत - छत्तीसगढ़ में दुर्गा माता की आरती , विभिन्न देवताओं की स्तुति आदि का वर्णन होता है । 


भोजली गीत - इसमें ताँत का बना एक वाद्य बनाकर स्त्रियों द्वारा गाया जाता है । 


करमा गीत - करमा गीत व नृत्य आदिवासियों को अत्यधिक प्रिय है । करमा गीत का मुख्य स्वर श्रृंगार है । 


बांस गीत - यह मूलतः गाथा गायन है । छत्तीसगढ़ में प्रायः इसे राउत जाति के लोग गाते हैं 


देवार गीत - देवार जाति द्वारा धुंघरूयुक्त चिकारा के साथ गाया जाने वाला गीत ।


गौरा गीत - माँ दुर्गा की स्तुति में गाया जाने वाला लोकगीत है , जो नवरात्रि के समय गाया जाता है । 


ददरिया गीत - ददरिया गीतों को छत्तीसगढ़ी लोकगीतों का राजा कहा जाता है । इन गीतों में सौन्दर्य व शृंगार की बहुलता होती है । 


लेजा गीत - बस्तर के आदिवासी बहुल क्षेत्रों का लोकगीत है । 


रेला गीत - मुरिया जनजाति का प्रसिद्ध गीत है । 


भडौनी गीत - विवाह के समय हँसी - मजाक को मूल लक्ष्य बनाकर गाया जाने वाला लोकगीत । 


नचौनी गीत - नारी की विरह वेदना , संयोग - वियोग के रसों से भरपूर प्रसिद्ध लोकगीत है । 


बैना गीत - छत्तीसगढ़ में तन्त्र साधना से सम्बन्धित लोकगीत , जो देवी - देवताओं को प्रसन्न करने के लिए गाया जाता है । 


राउत गीत - छत्तीसगढ़ी यादव समाज में दस दिनों तक चलने वाला प्रसिद्ध दिवाली नृत्य गीत है । 


लोरिक चन्दौनी गीत - छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में लोक कथाओं पर आधारित यह लोकप्रिय गीत है ।  


नागमत गीत - नागदेव के गुण - गान व नाग देश में सुरक्षा की प्रार्थना में गाया जाने वाला लोकगीत है , जो नागपंचमी अवसर पर गाया जाता है । 


डण्डा गीत - यह छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध नृत्य गीत है । यह प्रतिवर्ष पूर्णिमा से पूर्व गाया जाता है । इसे शैला नाच भी कहा जाता है । 


पहकी गीत - छत्तीसगढ़ में होली के अवसर पर अश्लीलतापूर्ण परिहास में गाया जाने वाला पन्थी गीत लोकगीत है । 


पंथी गीत - छत्तीसगढ़ में सतनामी सम्प्रदाय के लोगों द्वारा अध्यात्म महिमा में रची - बसा प्रसिद्ध नृत्य गीत है । 


धनकुल गीत - यह गीत बस्तर जिले में गाया जाता है ।


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