छत्तीसगढ़ में प्रमुख महानदी अपवाह तन्त्र हैं - छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियाँ


महानदी प्रवाह तन्त्र , गोदावरी प्रवाह तन्त्र , गंगा प्रवाह तन्त्र , नर्मदा प्रवाह तन्त्र तथा ब्रह्माणी प्रवाह तन्त्रा इन तन्त्रों के अन्तर्गत महानदी , शिवनाथ , अरपा , इन्द्रावती , सबरी , लीलागर , हसदो , माण्ड , पैरी तथा सोण्दर प्रमुख सहायक नदियाँ हैं । चित्रकूट जलप्रपात को भारतीय नियाग्रा के नाम से जाना जाता है ।

 महानदी को छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा , छत्तीसगढ़ की गंगा आदि की संज्ञा दी जाती है । इसे नीलोत्पला तथा महानन्दा भी कहा जाता है । बस्तर राज्य के प्रवाह तन्त्र की नदियों को छोड़कर छत्तीसगढ़ की अन्य प्रमुख नदियाँ शिवनाथ , अरपा , हसदो , पैरी , सोण्दर , जोक आदि महानदी से मिलकर इस नदी का हिस्सा बन जाती हैं । इसके अन्तर्गत महासमुन्द , राजनान्दगाँव , धमतरी , कबीरधाम ( कवर्धा ) तथा रायगढ़ आदि जिलों का विस्तार आता है । 

 🎯 छत्तीसगढ़ राज्य में मुख्यत चार अपवाह तन्त्र हैं ।

1. महानदी प्रवाह तन्त्र 
2. गोदावरी प्रवाह तन्त्र 
3. गंगा प्रवाह तन्त्र 
4. नर्मदा प्रवाह तन्त्र 


1. महानदी प्रवाह तन्त्र 
महानदी प्रवाह तन्त्र में महानदी प्रमुख नदी है । प्रदेश में इसका अपवाह क्षेत्र मुख्यतः कबीरधाम ( कवर्धा ) , दुर्ग , जांजगीर - चांपा , रायपुर , बिलासपुर तथा रायगढ़ जिलों में है । महानदी का विकास पूर्ण रूप से स्थलखण्ड के ढाल के स्वभाव अनुसार हुआ है । राजिम , सिरपुर , पलारी , शिवरीनारायण नदियाँ दक्षिण से उत्तर की ओर प्रवाहित होती है । 

महानदी 
• महानदी धमतरी के निकट सिहावा पर्वत से निकलकर रायपुर तथा जांजगीर - चांपा जिले की सीमा निर्धारित करती है । 
• दक्षिण की ओर से मिलने वाली सहायक नदियों में शिवनाथ , खाल , सोण्दूर पैरी , सूखा , जोंक और लात प्रमुख हैं , जबकि उत्तर की ओर से हसदो , माण्ड , केलो , अरपा , ईब आदि इसकी सहायक नदियाँ हैं ।
• महानदी की छत्तीसगढ़ प्रदेश में लम्बाई 286 किमी तथा कुल लम्बाई 858 किमी है । इसके तट पर बसे प्रमुख नगरों में शिवरीनारायण तथा दुर्ग हैं । यह नदी राज्य के 55 % क्षेत्र का जल संग्रहण करती है । राजिम में पैरी , सोण्डर तथा महानदी का संगम है । अतः इसे छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है । महानदी को छत्तीसगढ़ की गंगा के नाम से भी जाना जाता है । 

 महानदी को मुख्यतः निम्न भागों में विभक्त किया जा सकता है :

ऊपरी महानदी बेसिन 
• इसका अधिकांश भाग बस्तर तथा रायपुर में है । यह सिहावा पर्वत निकलकर एक संकरी घाटी से होती हुई उत्तर - पश्चिम की ओर लगभग 50 किमी दूरी तक प्रवाहित होकर बस्तर में कांकेर के निकट स्थित पानीडोंगरी पहाड़ियों तक पहुंचती है ।
• यहाँ यह पूर्व की ओर प्रवाहित लगती है । यहाँ पर पैरी एवं तेल नदियाँ महानदी में मिलती हैं । बस्तर में इसकी लम्बाई 64 किमी है तथा प्रवाह क्षेत्र 2,640 वर्ग किमी है । 

मध्य महानदी बेसिन 
• इसके अन्तर्गत दुर्ग मध्य रायपुर और बिलासपुर जिले का कुछ भाग सम्मिलित है । यह सम्पूर्ण क्षेत्र महानदी की प्रमुख सहायक नदी शिवनाथ का जलसंग्रहण क्षेत्र है , जिसमें उत्तरी - पश्चिमी एवं दक्षिणी सीमान्त उच्च भूमि से निकलने वाली सभी सहायक नदियाँ एवं नाले आकर मिलते हैं । 

निचला महानदी बेसिन 
• निचला महानदी बेसिन के अन्तर्गत बिलासपुर , रायपुर तथा रायगढ़ जिले आते हैं । 
• शिवनाथ - महानदी के संगम स्थल से महानदी एक तीव्र मोड़ लेकर बिलासपुर और रायपुर जिलों के मध्य एक प्राकृतिक सीमा बनाती है , जो पूर्वी ढलान की ओर प्रवाहित मध्य प्रदेश से बाहर निकल जाती है । 
• इस क्षेत्र में इसके उत्तर की ओर से हसदो , माण्ड एवं ईब नदियाँ तथा दक्षिण की ओर से जोंक एवं सुरंगी आकर मिलती हैं । रायपुर जिले में महानदी की लम्बाई 192 किमी तथा प्रवाह क्षेत्र 8,550 वर्ग किमी है 

शिवनाथ नदी
• शिवनाथ नदी महानदी की सबसे प्रमुख तथा सबसे बड़ी सहायक नदी है । यह पानावरस पहाही से निकलती है । यह नदी राजगान्दगाँव , दुर्ग , बिलासपुर तथा जाजगीर - जीपा जिलों में प्रवाहित होकर सोन लोहरसी पास ( रायपुर में लगी सीमा पर ) महानदी में मिल जाती है ।
• जलसंग्रहण क्षमता एवं लम्बाई की दृष्टि से यह राज्य की अत्यन्त महत्वपूर्ण नदी है । इसकी प्रदेश में लम्बाई 290 किमी है । इसकी सहायक नदियों में हॉफ , आगर , मनियारी , अरपा , खारून , लीलागर , तान्दुला , खरखरा , अमनेरा , खोरसी , जमुनिया आथि प्रमुख है । इस नदी के किनारे प्रमुरण स्थान अम्हागन चौगी , राजनान्दगाँव , दुर्ग , यमच्चा , नान्दघाट अवस्थित है ।

 मनियारी नदी 
• यह नदी बिलासपुर जिले के उत्तर - पश्चिम में लोरमी पठार के सिंहावल नामक स्थल से निकलती है । यह दक्षिण - पूर्वी भाग में बिलासपुर तथा मुंगेली तहसील की सीमा बनाती हुई प्रवाहित होती है । 
• मनियारी की सहायक नदियाँ आगर , छोटी नर्मदा तथा घोंघा हैं । इनके उद्गम केंद्र मुखण्डा पहाड़ बेलपास के कुण्ड से तथा लोरमी के पहाड़ी क्षेत्र हैं । छोटी नर्मदा का उद्गम स्थान बेलपास , इस क्षेत्र का पवित्र स्थल माना जाता है । 
• मनियारी नदी पर खुड़िया अथवा मनियारी जलाशय का निर्माण किया गया है । 

लीलागर नदी 
• लीलागर नदी का उद्गम कोरबा की पूर्वी पहाड़ी है । यह कोरबा क्षेत्र से निकलकर दक्षिण में बिलासपुर और जांजगीर तहसील की सीमा बनाती हुई शिवनाथ नदी में मिल जाती है । रायगढ़ जिले में नदी का प्रवाह क्षेत्र 960 वर्ग किमी है तथा नदी की लम्बाई 38 किमी है । बिलासपुर जिले में नदी का प्रवाह क्षेत्र 1,373 वर्ग किमी तथा नदी की लम्बाई 102 किमी है । 

अरपा नदी 
• अरपा नदी भी महानदी की एक सहायक नदी है । इसका उद्गम पेण्ड्रा - लोरमी के पठार में स्थित खोडरी पहाड़ी से हुआ है । यह बिलासपुर जिले के उत्तर - पश्चिमी भाग से दक्षिण की ओर प्रवाहित होकर बरतोरी के निकट ठाकुरदेवा स्थान पर शिवनाथ नदी से मिलती है । इसकी लम्बाई 100 किमी है । 
 इसकी सहायक नदी खारून से रतनपुर के पास खन्दाघाट नामक जलाशय का निर्माण किया गया है । बिलासपुर इसी नदी के किनारे स्थित है ।

तान्दुला नदी
• तान्दुला नदी शिवनाथ नदी की प्रमुख सहायक नदी है । तान्दुला नदी का उद्गम कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर के उत्तर में स्थित पहाड़ियाँ हैं । 34 किमी प्रवाहित होने के पश्चात् इस नदी में बालोद तथा आदमाबाद के पास एक नाला मिलता है । इसी स्थान पर तान्दुला बाँध बनाया गया है । 

खारून नदी 
• खारून नदी शिवनाथ नदी की प्रमुख सहायक नदी है । इस नदी का उद्गम दुर्ग जिले के दक्षिण - पूर्व में पेटेयुवा के समीप है । यह नदी 80 किमी उत्तर की ओर प्रवाहित होकर जामघाट के समीप शिवनाथ में मिल जाती है । दुर्ग जिले में नदी की लम्बाई 128 किमी है तथा प्रवाह क्षेत्र 19,980 वर्ग किमी हैं । यह जिले के प्रवाह क्षेत्र का 23.0 % है । रायपुर जिले में नदी की लम्बाई 80 किमी तथा प्रचार क्षेत्र 2,700 वर्ग किमी है । खन्दाघाट जलाशय का निर्माण इसी नदी पर किया गया है ।

पैरी नदी 
• पैरी नदी महानदी की प्रमुख सहायक नदी है । इसका उद्गम स्थल रायपुर जिले की बिन्द्रानवागढ़ के समीप लगभग 500 मी ऊंची भातृगढ़ पहाड़ी है । 
• यह नदी उत्तर - पश्चिमी दिशा की ओर बहती हुई राजिम में महानदी से मिलती है । रायपुर जिले में नदी की लम्बाई 90 किमी तथा प्रवाह क्षेत्र 3,000 वर्ग किमी है 

केलो नदी 
• इसका उद्गम स्थल लुडेग पहाड़ी है , जो रायगढ़ जिले की घरघोड़ा तहसील में है महादेव पाली नामक स्थान पर यह महानदी मिल जाती है । 

जोक 
• यह नदी रायपुर के पूर्वी भाग से निकल शिवरीनारायण के निकट महानदी में मिलती है । इसका कुल प्रवाह क्षेत्र 2,480 वर्ग किमी है । 
• ऑग ओडिशा के सराद्रपती के पास महानदी से मिलती है 

सुरंगी नदी 
• यह नदी रायगढ़ के दक्षिणी भाग से निकलकर लखमोरा के पास अंग नदी में मिलती है ।
• ओंग ओडिशा के सराद्रपती के पास महानदी से मिलती है ।

दूधी नदी 
• इसका उद्गम मलाजकुण्डम पहाड़ी से हुआ है । यह पूर्व की ओर प्रवाहित होती हुई महानदी में मिल जाती है । 

माण्ड नदी 
• माण्ड नदी अम्बिकापुर जिले के मैनपाट से निकली है ।
• यह सरगुजा , जशपुर , जांजगीर - चांपा जिलों में प्रवाहित होती हुई जांजगीर जिले में चन्द्रपुर के समीप महानदी में मिल जाती है । इसकी प्रदेश में कुल लम्बाई 155 किमी है । 

हसदो नदी
• हसदो कोरबा के कोयला क्षेत्र तथा चाँपा मैदान में प्रवाहित होने वाली महत्त्वपूर्ण नदी है । इसका उद्गम कोरिया जिले के सोनहट क्षेत्र में रामगढ़ के कैमूर की पहाड़ियों से हुआ है । 
• यह नदी उद्गम स्थल से निकलकर मार्तन एवं उपरोड़ा की चट्टानों तथा सघन वनाच्छादित धरातल में प्रवेश करती है , जो कठघोरा के निकट स्थित मैदानी भाग का उत्तर - पूर्वी किनारा है । 

बोरई नदी 
• बोरई नदी कोरबा के पठार से निकलकर दक्षिण की ओर प्रवाहित होकर महानदी में मिलती है । इसका प्रवाह क्षेत्र लगभग 1.810 वर्ग किमी है । 

हाँफ नदी 
• इसका उद्गम स्थल कांदावाड़ी पहाड़ी है । यह शिवनाथ नदी की सहायक नदी है । इसकी लम्बाई 44 किमी है । 

ईब नदी 
• यह महानदी की सहायक नदी है । इसका उद्गम स्थल जशपुर जिले की बगीचा तहसील में रानीझूला नामक स्थान है । 
• इसकी प्रदेश में कुल लम्बाई 87 किमी है । छत्तीसगढ़ और ओडिशा में बहने वाली लगभग 202 किमी लम्बी ईब नदी महानदी की सहायक नदी है । यह स्वर्ण कणों के लिए भी जानी जाती है ।

2. गोदावरी प्रवाह तन्त्र  
• गोदावरी प्रवाह तन्न का बहुत कम हिस्सा छत्तीसगढ़ में है । राजनान्दगाँव जिले के दक्षिण भाग का डाल दक्षिण की ओर है । अतः इस भाग की नदियाँ दक्षिण की ओर बहकर गोदावरी क्रम का एक हिस्सा बनाती हैं । 
• गोदावरी की सहायक कोटरी , कोहका तथा बाघ नदियों के अपवाह क्षेत्र दक्षिण - पश्चिमी सीमा पर राजनान्दगाँव उच्च भूमि में हैं । इसका विस्तार दक्षिणी जिलों कांकेर , बस्तर तथा दन्तेवाड़ा के अन्तर्गत है । बस्तर जिले का 93 % तथा राजनान्दगाँव जिले का 21 % भाग गोदावरी बेसिन में है । गोदावरी इस प्रवाह क्रम की प्रमुख नदी है । अन्य नदियाँ इन्द्रावती सबरी , चिन्ता आदि हैं । 

गोदावरी नदी
• गोदावरी का उद्गम स्थल महाराष्ट्र में नासिक के दक्षिण - पश्चिम में स्थित त्रयम्बक की पहाड़ी है । गोदावरी नदी छत्तीसगढ़ की दक्षिणी सीमा बनाती हुई प्रवाहित होती है । 
• गोदावरी की सहायक नदियाँ इन्द्रावती , सबरी , कोटरी , कोहका , बाघ आदि हैं । बस्ता जिले में नदी की लम्बाई 24 किमी एवं जिले में इसका प्रवाह क्षेत्र 4,240 वर्ग किमी जो जिले के प्रवाह क्षेत्र का 10.8 % है । राजनान्दगाँव में नदी का प्रवाह क्षेत्र 2,558 वर्ग किमी है । 

कोटरी नदी
• कोटरी नदी इन्द्रावती नदी की सबसे लम्बी सहायक नदी है । इसका उद्गम राजनान्दगाँव जिले की मोहला तहसील से हुआ है । इसका अपवाह क्षेत्र दक्षिण - पश्चिमी सीमा पर राजनान्दगाँव उच्च भूमि में है । यह उत्तर से दक्षिण की ओर बहती हुई राजनान्दगाँव , ककिर और बस्तर जिलों में होती हुई महाराष्ट्र में प्रवेश कर इन्द्रावती नदी में मिलती है । जलप्रपात बनाती है । 

इन्द्रावती नदी 
• इन्द्रावती नदी कालाहाण्डी ( ओडिशा ) जिले में स्थित 4,000 फीट ऊँची मुंगेर पहाड़ी से निकली है । यह पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हुई जगदलपुर जिले से 40 किमी दूर चित्रकूट जलप्रपात बनाती है।
• यह महाराष्ट्र से छत्तीसगढ़ की सीमा बनाती हुई दक्षिण दिशा में प्रवाहित होती है और अन्त में छत्तीसगढ़ , महाराष्ट्र , आन्ध्र प्रदेश के सीमा संगम पर भोपालपट्टनम के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग 202 पर स्थित भद्रकाली के समीप गोदावरी में मिल जाती है ।
• इस नदी की प्रदेश में लम्बाई 264 किमी है । इसकी प्रमुख सहायक नदियों में कोटरी , निबरा , बोराडिग , नारंगी उत्तर की ओर से तथा नन्दीराज , चिन्तावागु इसके दक्षिण एवं दक्षिण - पूर्वी दिशाओं में मिलती हैं ।
• दक्षिण - पश्चिम की ओर डंकिनी और शंखिनी नदियाँ इस नदी में मिलती हैं । इस नदी पर बाघ घाटी परियोजना प्रस्तावित है । 

डंकिनी और शंखिनी
• दक्षिण - पश्चिम में इन्द्रावती की सहायक नदियाँ डंकिनी तथा शंखिनी हैं । डंकिनी नदी किलेपाल एवं पाकनार की डांगरी डोंगरी से निकलती है । 
• शंखिनी का उद्गम बैलाडीला पहाड़ी के 4,000 फीट ऊँचे नन्दीराज शिखर से हुआ है । 
• डंकिनी - शंखिनी का संगम दन्तेवाड़ा में होता है । शंखिनी छत्तीसगढ़ की सबसे प्रदूषित नदी है 

नारंगी नदी 
• नारंगी नदी का उद्गम स्थल जगदलपुर जिले की उत्तर - पूर्वी सीमा पर स्थित मकड़ी नामक स्थान है । नारंगी नदी चित्रकूट प्रपात के निकट इन्द्रावती में मिलती है 
• इसमें उत्तर - पूर्वी बस्तर की कोण्डागाँव तहसील की अधिकांश भूमि का जल संगृहीत होता है । 

गुदरा नदी 
• यह नदी बस्तर जिले की नारायणपुर तहसील से निकलकर छोटाडोंगर की चट्टानों के बीच से अबूझमाड़ की वनाच्छादित पहाड़ियों के मध्य प्रवाहित होती है । यह इन्द्रावती में बारसूर के समीप मिल जाती है । 

कोभरा नदी 
• कोभरा नदी अपने अधिकांश प्रवाह में बस्तर की सीमा बनाती है ।

मरी नदी 
• मरी या मोरल शब्द वास्तव में मुरला का अपभ्रंश है । मरी का नाम पहले मोरल था । यह दक्षिण पश्चिम दिशा में भैरवगढ़ से निकलकर बीजापुर की ओर प्रवाहित होती है 

सबरी नदी 
• सबरी नदी को कोलाब भी कहते हैं । इसका उद्गम ओडिशा के कोरापुट जिले से हुआ है यह गोदावरी की दूसरी बड़ी सहायक नदी है । 
• यह दन्तेवाड़ा जिले में पश्चिम से पूर्व फिर उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होते तेलंगाना के खम्मम जिले में भद्राचलम के पश्चिम में लगभग 50 किमी की दूरी पर गोदावरी में मिल जाती है ।
• इसकी प्रदेश में कुल लम्बाई 173 किमी है ।
• इस नदी में स्टीमर तथा नाव द्वारा परिवहन होता है । रानीधारा जलप्रपात इसी नदी पर अवस्थित है ।

बाघ नदी 
• बाघ नदी राजनान्दगाँव जिले की कुलझारी पहाड़ी से निकलती है । 
• यह वेनगंगा प्रवाह तन्त्र की एक शाखा है , जो राजनान्दगांव जिले की पश्चिमी सीमा का निर्धारण करती हुई महाराष्ट्र में प्रवेश कर मध्य प्रदेश की दक्षिण - पूर्वी सीमा बनाती हुई बालाघाट जिले में वेनगंगा से मिल जाती है ।

3. गंगा प्रवाह तन्त्र 
• गंगा नदी के प्रवाह तन्त्र का विस्तार प्रदेश के 15 % भाग में है । बिलासपुर जिले का 5 % भाग गंगा बेसिन के अन्तर्गत है । 
• रायगढ़ जिले का 14 % भाग तथा सरगुजा जिले का 7 % से 8 % भाग गंगा बेसिन के अन्तर्गत है । इस नदी क्रम के अन्तर्गत गंगा नदी तथा सोन नदी की सहायक नदियाँ कन्हार , रेहार , गोपद , बनास , बीजाल , सोप आदि आती हैं । 

रिहन्द नदी 
• रिहन्द नदी का उद्गम मतिरिंगा पहाड़ी के पास से निकलती है । यह सरगुजा जिले में दक्षिण से उत्तर की ओर प्रवाहित होती हुई उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के चोपन के समीप सोन में मिल जाती है । 
• रिहन्द नदी की लम्बाई 145 किमी है । प्रदेश की सीमा पर रिहन्द बाँध बनाया गया है , जिसका आधा हिस्सा उत्तर प्रदेश में ( गोविन्द बल्लभ पन्त सागर ) पड़ता है । इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ गोदावरी , मोरना , माहन आदि हैं ।

कन्हार नदी 
• कन्हार नदी का उद्गम स्थल बगीचा तहसील की बखोना चोटी में है । यह जशपुर जिले की उत्तरी सीमा से निकलकर सरगुजा जिले में दक्षिण - पूर्व में पूर्वोत्तर की ओर छत्तीसगढ़ - झारखण्ड सीमा बनाते हुए उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में प्रवेश कर चोपन रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर कोटा नामक स्थान के समीप सोन में मिल जाती है ।

सोन नदी 
• यह गंगा की सहायक नदी है । इसका उद्गम स्थल बंजारी पहाड़ी है । यह पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हुई गंगा में मिल जाती । इसकी सहायक नदियाँ रिहन्द , गोपद , बनास , कन्हार एवं बीजाल हैं । यह नदी राज्य के उत्तरी भाग से बहती है । 

4. नर्मदा प्रवाह तन्त्र 
• कबीरधाम जिले में बहने वाली बंजर , टाण्डा एवं उसकी सहायक नदियाँ नर्मदा प्रवाह प्रणाली के अन्तर्गत हैं । छत्तीसगढ़ में नर्मदा प्रवाह प्रणाली की नदियों का प्रवाह क्षेत्र 710 वर्ग किमी क्षेत्र में है । मैकाल श्रेणी महानदी प्रवाह क्रम को नर्मदा प्रवाह क्रम से अलग करती है । 
• राजनान्दगाँव जिले की पश्चिमी सीमा पर भूमि का ढाल उत्तर - पश्चिम की ओर है । जिले की पश्चिमी सीमा पर ही टाण्डा एवं बंजर नदियाँ उत्तर - पश्चिम की ओर बहती हैं ।

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